BULAND PARWAZ NEWS DIGITAL DESK MUMBAI….
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और ‘ही-मैन’ के नाम से पहचाने जाने वाले धर्मेंद्र का 89 वर्ष की उम्र में सोमवार को निधन हो गया। मुंबई के जुहू स्थित residence पर उन्होंने अंतिम सांस ली। लंबे समय से सांस लेने में दिक्कत के कारण वह अस्पताल में भर्ती थे। ICU में इलाज के बावजूद उनकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ और आज वे जिंदगी की जंग हार गए।
धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार विले पार्ले के पवन हंस श्मशान भूमि में किया गया, जहां उनके बड़े बेटे सनी देओल ने नम आंखों के साथ मुखाग्नि दी। इस दौरान देओल परिवार पूरी तरह गम में डूबा नजर आया—हेमा मालिनी, ईशा देओल, बॉबी देओल और अहाना देओल भावुक दिखे।
अंतिम यात्रा में बॉलीवुड का लगभग हर बड़ा सितारा शामिल हुआ। अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन, शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान, अनिल कपूर, सनील शेट्टी, संजय दत्त सहित कई दिग्गज कलाकार धर्मेंद्र को आखिरी विदाई देने पहुंचे। हर चेहरे पर उदासी, आंखों में आंसू और माहौल में गहरी खामोशी थी।
8 दिसंबर को धर्मेंद्र अपना 90वां जन्मदिन मनाने वाले थे, लेकिन उससे महज 14 दिन पहले ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। पिछले एक महीने से उन्हें गंभीर सांस संबंधी समस्याएं थीं। 10 नवंबर को दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया था और खबर थी कि वह कुछ समय वेंटिलेटर पर भी रहे। डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन उम्र और बीमारी के आगे सब बेबस हो गए।
धर्मेंद्र का जन्म 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के लुधियाना जिले में हुआ था। उनका असली नाम केवल कृष्ण देओल था। 19 साल की उम्र में उन्होंने प्रकाश कौर से शादी की, जिससे सनी और बॉबी देओल सहित चार बच्चे हुए। बाद में फिल्मों के दौरान उनकी मुलाकात हेमा मालिनी से हुई और दोनों ने विवाह कर लिया। इस रिश्ते को लेकर उस दौर में खूब सुर्खियां और विवाद भी हुए।
साल 1960 में ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से बॉलीवुड में कदम रखने वाले धर्मेंद्र ने अपने छह दशक लंबे करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया। ‘फूल और पत्थर’, ‘आए दिन बहार के’, ‘सीता और गीता’, ‘यादों की बारात’, ‘शोले’, ‘धरम वीर’, ‘गुलामी’, ‘चुपके चुपके’, ‘द बर्निंग ट्रेन’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से उन्होंने हिंदी सिनेमा में अमिट छाप छोड़ी। 1987 में एक साल में लगातार 7 सुपरहिट फिल्में देने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है।
हाल के वर्षों में भी धर्मेंद्र पर्दे पर सक्रिय रहे और ‘लाइफ इन ए मेट्रो’, ‘जॉनी गद्दार’, ‘अपने’, ‘यमला पगला दीवाना’, ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ जैसी फिल्मों में नजर आए।
सिनेमा में उनके योगदान के लिए 2012 में उन्हें भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण मिला। 2017 में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर नोबेल पुरस्कार और 2020 में न्यू जर्सी राज्य द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
धर्मेंद्र का जाना हिंदी सिनेमा के एक युग का अंत है। उनका कद, उनकी सादगी, उनका संघर्ष और उनकी हंसमुख पहचान हमेशा दर्शकों के दिल में जिंदा रहेगी।
ही-मैन आज पंचतत्व में विलीन हो गए, लेकिन उनकी विरासत अमर है।


